पद्मश्री योगी ऐरन के ‘जंगल-मंगल’ में तोड़फोड़, 50 लोगों की भीड़ पर आरोप, एक्शन में पुलिस – Uttarakhand Nidhi

पद्मश्री योगी ऐरन के ‘जंगल-मंगल’ में तोड़फोड़, 50 लोगों की भीड़ पर आरोप, एक्शन में पुलिस

देहरादून: राजपुर थाना क्षेत्र के कुठाल गेट स्थित ‘जंगल-मंगल’ संपत्ति में मंगलवार सुबह करीब 50 लोगों के जबरन घुसने और उत्पात मचाने का मामला सामने आया है. पद्मश्री से सम्मानित 87 वर्षीय डॉ. योगी ऐरन ने आरोप लगाया कि भीड़ ने परिसर में रखा सामान उठाने की कोशिश की. विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई और तोड़फोड़ की गई. मामले में उन्होंने राजपुर थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है.
सुबह छह बजे पीछे के रास्ते से घुसी भीड़: डॉ. योगी ऐरन के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब छह बजे महिला और पुरुषों समेत लगभग 50 लोग पीछे के रास्ते से उनकी संपत्ति में दाखिल हुए. शुरुआत में स्टाफ को लगा कि लोग घूमने आए हैं, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने परिसर में रखा सामान उठाना शुरू कर दिया. विरोध करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी और तोड़फोड़ कर वहां से चले गए. डॉ. ऐरन का कहना है कि वह अपनी वृद्ध पत्नी के साथ रहते हैं. घटना के बाद से भयभीत हैं. पीड़ित पक्ष ने घटना से जुड़े फोटो, वीडियो और ऑडियो भी पुलिस को सौंपे हैं.
1982 से रहने का दावा, हरियाली बचाना चाहते हैं डॉ. ऐरन: डॉ. योगी ऐरन का दावा है कि वह साल 1982 से ‘जंगल-मंगल’ में रह रहे हैं. उनका आरोप है कि शहर की प्राइम लोकेशन पर स्थित इस संपत्ति पर कुछ लोगों की नजर है. वह आशंका जता रहे हैं कि इस जगह को खरीदकर इसकी हरियाली खत्म कर इसे कंक्रीट के जंगल में बदला जा सकता है. डॉ. ऐरन का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर ‘जंगल-मंगल’ का अस्तित्व खत्म नहीं होने देना चाहते. उन्होंने दावा किया कि पास की एक अन्य संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद का उनकी संपत्ति की मूल जमीन से कोई संबंध नहीं है.
पुलिस ने दोनों पक्षों से मांगे जमीन के दस्तावेज: थाना राजपुर प्रभारी पीड़ी भट्ट ने बताया योगी ऐरन की ओर से तहरीर मिली है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दूसरे पक्ष को मौके से हटाया और मामले की जांच शुरू कर दी है. जांच कुठाल गेट चौकी प्रभारी को सौंपी गई है. पुलिस ने दोनों पक्षों से जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं. साथ ही, संपत्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व विभाग से सीमांकन कराकर रिपोर्ट लेने को कहा गया है.
रजिस्ट्री और जमीन के क्षेत्रफल की भी होगी जांच: पीड़ित पक्ष का कहना है कि साल 1982 में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी, लेकिन खरीदी गई जमीन का कुल क्षेत्रफल स्पष्ट नहीं है. पुलिस अब रजिस्ट्री समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाएगी कि जमीन किससे खरीदी गई थी? उसका कुल रकबा कितना है? पुलिस के अनुसार, डॉ. ऐरन को बयान दर्ज कराने के लिए आज बुलाया गया है. जमीन के दस्तावेजों के सत्यापन और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.




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