दून मेडिकल कॉलेज के दांत रोग विभाग में हुए २ अदभुत ऑपरेशन

२४ वर्षीय युवक की निचले जबड़े की टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए लैग स्क्रू का इस्तेमाल किया गया। मैक्सिलोफ़ेशियल सर्जरी में लैग स्क्रू बहुत कम सर्जन्स उसके तकनीक संवेदनशील होने के कारण इस्तेमाल करते है और उत्तराखंड में पहली बार एसी सर्जरी हुई है ।
लैग स्क्रू की मदद से, जबड़े के टुकड़ों को संपीड़ित करके स्थिर किया जाता है.। और लैग स्क्रू का इस्तेमाल:
– कई सरल फ़्रैक्चर जैसे कि सर्पिल या तिरछा फ़्रैक्चर के इलाज में किया जा सकता है.
– ⁠विशिष्ट परिस्थितियों में, मल्टीफ़्रैग्मेंटरी फ़्रैक्चर के बड़े टुकड़ों को संपीड़ित करने के लिए भी लैग स्क्रू का इस्तेमाल किया जा सकता है.
– ⁠एवं 3D स्थिरता और घूर्णी बलों के निष्प्रभावन के लिए, फ़्रैक्चर सतह पर लंबवत रूप से कम से कम दो स्क्रू डाले जाते हैं।

इसके अलावा उत्तरकाशी से दाहिने चेहरे पर विकराल सूजन लेके आयी ५ वर्षीय बालिका का इमरजेंसी ओटी में इनसिशन एंड ड्रेनेज प्रोसीजर के माध्यम से सही समय पर पस निकाल कर जान के ख़तरे को टाला और विकृत चहरा ठीक कर सुंदर मुस्कान लोटायी ।
बालिका इस सूजन और दर्द से परेशान १२ दोनों से पहाड़ पर कई डॉक्टरों के चक्कर काट चुकी थी , और माता पिता काफ़ी परेशान होके अंत में दून हॉस्पिटल पहुँचे । इज सूजन को स्पेस इन्फेक्शन कहा जाता है , और यह सड़े दांत के इन्फेक्शन की वजह से होती है हो कि ऊपरी जबड़े से आँख या दिमाग़ तक पहुँच सकती है और निचले जबड़े से गले तक जिसके कारण जान की हानि होना भी संभव है ।
दोनों सफल ऑपरेशन विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ अमित शाह मैक्सिलोफ़ेशियल सर्जन द्वारा किए गए जिसमे उनकी पूरी डेंटल टीम डॉ प्रत्यक्ष , डॉ देवशीष , डॉ पल्लवी , डॉ योगेश्वरी , डॉ विदिशा , डॉ ऋषिराज ने पूर्ण समर्थन दिया । एवं एनेस्थीसिया विभाग डॉ गौरव चोपड़ा , डॉ अतुल , डॉ दीपिका तिवारी , डॉ शोभा , डॉ सत्यांश और उनकी पूरी टीम के सहयोग से यह ऑपरेशन कृतार्थ हुए ।

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