आसन वेटलैंड में प्रवासी परिंदों का आगमन शुरू, सुर्खाब बने पहले मेहमान; इतने महीने रहता है डेरा – Uttarakhand Nidhi

आसन वेटलैंड में प्रवासी परिंदों का आगमन शुरू, सुर्खाब बने पहले मेहमान; इतने महीने रहता है डेरा

 देश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व व उत्तराखंड के पहले रामसर साइट आसन वेटलैंड  (RAMSAR Wetland Sites) में विदेशी परिंदों का प्रवास के लिए आना शुरू हो गया है। सबसे पहले रुडी शेलडक यानि सुर्खाब उत्तराखंड (Uttarakhand) के मेहमान बने हैं। शनिवार को 40-50 सुर्खाब ने वेटलैंड में डेरा डाला है। इसी के साथ ही चकराता वन प्रभाग की रात-दिन की गश्त भी शुरू हो गई है।

अक्टूबर से मार्च तक प्रवास पर रहते हैं विदेशी परिंदे

पिछले पांच साल से आसन वेटलैंड में अक्टूबर माह की सात तारीख को प्रवासी परिंदों का आना शुरू हो जाता है। शनिवार को सुर्खाब प्रजाति के परिंदे आसन वेटलैंड में आए। हर बार सबसे पहले सुर्खाब ही उत्तराखंड (Uttarakhand) के मेहमान बनते हैं। अपने सुनहरे पंखों के कारण सुर्खाब सबसे ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करता है। आसन वेटलैंड में अक्टूबर से मार्च तक विदेशी परिंदे प्रवास पर रहते हैं। चकराता वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मयंक शेखर झा ने आसन वेटलैंड में प्रवासी परिंदों के प्रवास को देखते हुए रात-दिन की गश्त भी शुरू करा दी है।

यहां पर आते हैं ज्यादा प्रवासी परिंदे

गढ़वाल क्षेत्र में आसन वेटलैंड, हरिद्वार के भीमगोड़ा बैराज, ऋषिकेश के वीरभद्र बैराज में विदेशी परिंदे प्रवास को आते हैं। परिंदों की सबसे अधिक संख्या रामसर साइट आसन वेटलैंड (RAMSAR Wetland Sites) में होती है। परिंदों को यहां के घास के झुरमुट, यमुना, चारों तरफ हरे भरे पर्वतीय क्षेत्र, मड टापू परिंदों के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं। यही वजह है कि आसन वेटलैंड में बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे उत्तराखंड (Uttarakhand) के मेहमान बनते हैं।

कब कितने आए परिंदे

वर्ष – प्रजाति – परिंदों की संख्या

2015 – 48 – 5796

2016 – 84 – 5635

2017 – 60 – 4569

2018 – 61 – 6008

2019 – 69 – 6170

2020 – 50 – 4466

2021 – 55 – 4497

2022 – 49 – 5680

2023 – 42 – 4642

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