उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अधिकारियों के तबादलों के लिए सरकार के पास एक नवंबर तक का समय है. इसके बाद जिलाधिकारियों समेत फील्ड स्तर के अधिकारियों के तबादलों के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति जरूरी होगी. उधर, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) के तहत 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है. ऐसे में जनवरी के दूसरे सप्ताह तक आचार संहिता लागू होने की संभावना है.
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच अधिकारियों के तबादलों और निर्वाचन आयोग की समयसीमा को लेकर सरकार के सामने अहम चुनौती है. सरकार के पास जिलाधिकारियों समेत फील्ड स्तर के अन्य अधिकारियों के सामान्य तबादले करने के लिए 1 नवंबर तक का समय है. इसके बाद अधिकारियों के तबादले करने के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति लेनी होगी. ऐसे में नवंबर की शुरुआत से ही प्रशासनिक स्तर पर होने वाले बदलावों के लिए सरकार को आयोग की मंजूरी पर निर्भर रहना पड़ सकता है.
दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग भी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटा है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अब मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की प्रक्रिया चल रही है. इसके तहत 4 जनवरी 2027 को अंतिम निर्वाचन नामावली का प्रकाशन प्रस्तावित है. मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद प्रदेश में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है. ऐसे में जनवरी के दूसरे हफ्ते तक विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने की अटकलें हैं.
सरकार के सामने फिलहाल दो स्तरों पर समयसीमा का दबाव है. एक तरफ सामान्य प्रक्रिया के तहत अधिकारियों के तबादलों के लिए 1 नवंबर तक का समय है, तो दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग चुनाव से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहा है. यदि सरकार 2 नवंबर या इसके बाद जिलाधिकारियों समेत फील्ड स्तर के अधिकारियों के तबादले करती है, तो इसके लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति लेना जरूरी होगा.
चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की भूमिका अहम होती है. जिलाधिकारियों से लेकर फील्ड स्तर के अधिकारियों तक की जिम्मेदारियां चुनाव प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं. ऐसे में चुनाव की तैयारियों के बीच अधिकारियों के तबादलों को लेकर निर्वाचन आयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी.
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम निर्वाचन नामावली प्रकाशित होने के बाद चुनावी तैयारियां अगले चरण में पहुंचेंगी. 4 जनवरी की निर्धारित समयसीमा के बाद राजनीतिक दलों और प्रशासन की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है. यदि जनवरी के दूसरे हफ्ते में आचार संहिता लागू होती है, तो सरकार के पास प्रशासनिक बदलावों के लिए उपलब्ध समय और सीमित हो जाएगा.
पिछले विधानसभा चुनाव में 8 जनवरी को आचार संहिता लागू हुई थी. इसी आधार पर इस बार भी जनवरी के दूसरे हफ्ते को लेकर चर्चाएं तेज हैं. हालांकि, आचार संहिता लागू करने की वास्तविक तारीख निर्वाचन आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगी. फिलहाल, सरकार के लिए नवंबर की शुरुआत तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी करना अहम है.
