देहरादून, ब्यूरो। सोशल एक्टिविस्ट व एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने देहरादून कचहरी परिसर स्थित अपने कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबाधित किया। इस दौरान उन्होंने देहरादून के रायपुर रिंग रोड़ क्षेत्र में 350 बीघा के करीब सरकारी जमीन को कब्जा कर बेचने के ‘खेल‘ से पर्दा उठाया। विकेश सिंह नेगी ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट, सीलिंग एक्ट, एडीएम देहरादून के जजमेंट, सहित जमीन के असली मालिक कुंवर चंद्र बहादुर के एडवोकेट के द्वारा कोर्ट में दिया गये दस्तावेज भी पत्रकारों के सम्मुख प्रस्तुत किए।
देहरादून शहर में सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द करने का खेल जारी है। नया मामला रायपुर, लाडपुर, चकरायपुर और नत्थनपुर की लगभग 350 बीघा जमीन को बेचने का है। सीलिंग की इस जमीन को भूमाफिया, नेता और तहसील अधिकारियों की मिलीभगत से बेच दिया गया है। सोशल एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी के अनुसार यह जमीन अरबों रुपये की है। उनका कहना है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। साथ ही बैंको द्वारा किस आधार पर एनओसी और लोन दिया जा रहा है। इसकी जांच के लिए सीबीआई निदेशक को भी पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया है।
सोशल एक्टिविस्ट व एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक नेता इस घोटाले में नेता, अफसर, ठेकेदार और हिस्ट्री शीटर की मिलीभगत है। सबसे अहम बात यह है कि इस जमीन पर बैंक लोन भी दे रहे हैं। उनकी मांग है कि बैंकों के खिलाफ सीबीआई जांच हो और साथ ही दोषी लोगों के खिलाफ सीलिंग एक्ट के सेक्शन 35 के तहत मुकदमे दर्ज किये जाएं। इसके साथ ही एमडीडीए से भी जवाब तलब किया जाये कि आखिर व नक्शे किस आधार पर पास कर रहा है। इस मामले में एमडीडीए अधिकारियों की भी मिलीभगत नजर आ रही है। क्योंकि बड़ा सवाल यह है कि कैसे चाय बागान को मास्टर प्लान से गायब कर दिया गया.? मेरे राज्य सरकार से मांग है कि इस जमीन की रजिस्ट्री पर तुरंत रोक लगाई जाए और जमीन की खरीद-फरोख्त करने वालों पर केस दर्ज हों। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
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