निठारी कांड में सुरेंद्र कोली का नाम 2006 में सामने आने के बाद उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ गईं। मां, पत्नी और बच्चों को लोगों के तानों का सामना करना पड़ा और बच्चों के स्कूल में दाखिले में भी परेशानी आई।देश के चर्चित निठारी कांड से चर्चा में रहे अल्मोड़ा के सुरेंद्र कोली ने दोषमुक्त होने के करीब 10 माह बाद हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। सुप्रीम कोर्ट से बरी किए जाने के बाद अपने गृहक्षेत्र मंगरुखाल आया था। इन दिनों वह हरिद्वार में सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा था।अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के मंगरुखाल गांव निवासी सुरेंद्र करीब 21 साल जेल में रहा। निठारी कांड से जुड़े अंतिम लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को उसकी दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था। इसके साथ ही उसके खिलाफ निठारी कांड से जुड़े सभी आपराधिक मामलों का अंत हो गया था। रिहाई के बाद सुरेंद्र हरिद्वार में रहकर चाय की दुकान चला रहा था और सामान्य जीवन शुरू करने का प्रयास कर रहा था। इसी बीच उसकी मौत हो गई।
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